Wednesday, August 10, 2022

दुःख का साया (dukh ka saya )

उदासी सी छाई थी चहरे पर,
उदासी सी छाई थी चहरे पर,
दुःख का एक साया था खुशीयों  पर.

आप से बिछड़ने का गम कभी कम न था,
आप से बिछड़ने का गम कभी कम न था,
दुरी कम थी पर फासला गहरा था.
 
जख्म दिल पर लगे, कुछ ऐसे 
हाँ जख्म दिल पर लगे, कुछ ऐसे 
की वक़्त से भी न भर पाए, 
मेरी आँखों से प्यार बहता गया,
पर आप कभी देख ना पाए, 
पर आप कभी देख ना पाए.

अब तो यादे भी चुभती हैं,
हाँ, अब तो यादे भी चुभती हैं,
जब लम्हे खुद को दोहराते हैं
हकीकत से रूबरू जाने क्यों,
ना हम कभी हो पाए,
ना हम कभी हो पाए,
 हो पाए.



Written by - 
©Ashwini Chaudhary 

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