Thursday, November 28, 2019

कशिश (Kashish)

एक कशिश सी उठी है मन मैं,
कहने की हिचकिचाहट हैं,
बंद आखो से जो देख रहे है,
उसे कुछ कुछ महसूस करने लगे हैं,

शुरवात कहा से करे, और कैसे करे जाया,
कुछ कुछ हरकत करने लगा है दिल,
जब जब आपको सामने पाया,

कहने की कोशिश कैसे करे,
अल्फ़ाज़ गुम हैं शायद,
ये कैसी कशिश उठी हैं मन मैं,
रुका रुका सा है सब कुछ,

अब तो, गुदगुदा रहा हैं मन मेरा,
आपके होने के कारन, आपके पास होने के कारन,
आपके साथ होने के कारन, ये अहसास के कारन.

एक कशिश उठी है मन मैं,
एक कशिश.








Written by-
©Ashwini Chaudhary.


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