फड़फड़ा रही थी पंख खुले आसमान मैं,
मूंदे पलके उड्डाण भर रही थी आँखे
पर, जब आँखें खुली तोह, खुद को ज़मीन पर पाया
सपनो को कुछ अपने, ज़ख़्मी सा पाया
उड़ने दो मुझे, आज़ादी का हक़ है मुझे,मत रोको मेरी उड़ान को उड़ने का हक़ है मुझे.
जितने ज़िंदा तुम हो, उतनी ही ज़िंदा मैं भी हु,
जैसे साँसे तुम भरो, वैसे ही साँसे मैं भरू,
देखो सपने जैसे तुम, वैसे ही कुछ मैं देखु,
जीने की उम्मीद लिए, उन्हें पूरा करने मैं चलु,
हाँ, इसीलिए उड़ने दो मुझे, आज़ादी का हक़ है मुझे,
मत रोको मेरी उड़ान को,उड़ने का हक़ है मुझे,
नहीं टूटेंगे अब ये होंसले, आज़मा लो दम जितना,
आखरी वार मौत का होगा, और क्या कर सकोगे तुम,
हस्ते हस्ते निकले दम, फिर भी जीतूंगी मैं,
आखरी दरवाजा मौत का, भी हस्ते पार कर जाऊंगी मैं,
जीतेंगे मेरे हौसले टूटेगा बाल का गुरूर ज़ोर से,
हाँ, इसीलिए उड़ने दो मुझे, आज़ादी का हक़ है मुझे,
मत रोको मेरी उड़न को,उड़ने का हक़ है मुझे,
उफ़!! अब किसपर ज़ोर अज़माओगे, इस बाल का,
कुछ कुछ हारने लगे हो तुम, चलो हार मान लो,
अपनी ही नज़रो मैं गिरने लगे हो तुम,
आज़ादी पर हक़ हैं सब का,
बेड़िया ना डालो तुम, बेड़िया ना डालो तुम
खुद का गुरुर तोड़ो, ना भेद करो अब तुम
इउड़ने दो मुझे, आज़ादी का हक़ है मुझे,
मत रोको मेरी उड़न को,उड़ने का हक़ है मुझे,
हाँ, हक़ हैं मुझे, हक़ हैं मुझे.
Written by-
©Ashwini Chaudhary.
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