कुछ लम्हे प्यार के समेट रहे हैं हम,
तुजे फिर से याद कर, ज़िन्दगी जी रहे हैं हम,
हां ज़िन्दगी जी रहे हैं हम,
दूर हो मगर, इन यादो से कैसे दूर जाओगे,
मिटा दोगे सब, पर अहसासो को कैसे मिटा पाओगे,
रोक तो लोगे खुद को, पर,
पर अपने दिल को कैसे समझाओगे ??
कैसे संमझाओगे???
चलो एक बात बताओ ............
तुम.................
तुम, हमे अब और् क़ितना याद आओगे??😊
Written by -
© Ashwini Chaudhary.
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