बिताए हुए लम्हों को याद् कर, हमेशा हसना
इतनी सी है गुज़ारिश, हमेशा खुश रहना
कसूर न तुम्हारा था, ना कसूरवार हम थे,
वह वक़्त का बेदर्द नज़ारा था,
जिससे झुंझला उठा सब कुछ,
राँख हुए अरमान मेरे, हाँथ न आया कुछ
रह गइ यादे सारी, और जल गया सुबकुछ.
जी मैं आता हैं घुमाउँ दोबारा, वक़्त का पैंय्या,
लौट जाऊ उस वक़्त मैं ,जंहा खत्म हो ये दूरियां
पर, पर अफ़सोस नियति कभी बदलती नहीं
ना बदलता है विधान, होवे हैं सब विधिलिखित
तोड जोड़ सब कर्म के,
लिखां जा चूका हैं विधान अब ना बदलेगा कुछ
अब न बदलेगा कुछ, न बदलेगा कुछ
Written by-
© Ashwini Chaudhary.
भारी !!
ReplyDeleteएक गुज़ारिश तो हमारी भी थी
कभी ख़ुद को अकेला ना समझना
भले पूरी जिंदगी ना निभा पाए साथ
पर जितना जियेंगे तुम्हारी खुशियों का
ख़याल ऱखने की पूरी कोशिश करेंगे
वक़्त बदल जायेगा पर सच्चा इंसान
कभी साथ ना छोड़ पायेगा
©️वर्षा_शिदोरे
वाँ वाँ क्या बात है
ReplyDelete😊😊👍
Mast
ReplyDeleteNice
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