Wednesday, October 23, 2019

गुज़ारिश (guzarish)

मैं अगर ना रहु तो, मुझे याद कर, ना रोना 
बिताए हुए लम्हों को याद् कर, हमेशा हसना 
इतनी सी है गुज़ारिश, हमेशा खुश रहना

कसूर न तुम्हारा था, ना कसूरवार हम थे,
वह वक़्त का बेदर्द नज़ारा था, 
जिससे झुंझला उठा सब कुछ,
राँख हुए अरमान मेरे, हाँथ न आया कुछ 
रह गइ यादे सारी, और जल गया सुबकुछ.

जी मैं आता हैं घुमाउँ दोबारा, वक़्त का पैंय्या,
लौट जाऊ उस वक़्त मैं ,जंहा खत्म हो ये दूरियां
पर, पर अफ़सोस नियति कभी बदलती नहीं
ना बदलता है विधान, होवे हैं सब विधिलिखित
तोड जोड़ सब कर्म के,
लिखां जा चूका हैं विधान अब ना बदलेगा कुछ
अब न बदलेगा कुछ, न बदलेगा कुछ  


Written by- 
© Ashwini Chaudhary.

 

4 comments:

  1. भारी !!

    एक गुज़ारिश तो हमारी भी थी
    कभी ख़ुद को अकेला ना समझना
    भले पूरी जिंदगी ना निभा पाए साथ
    पर जितना जियेंगे तुम्हारी खुशियों का
    ख़याल ऱखने की पूरी कोशिश करेंगे
    वक़्त बदल जायेगा पर सच्चा इंसान
    कभी साथ ना छोड़ पायेगा

    ©️वर्षा_शिदोरे

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  2. वाँ वाँ क्या बात है
    😊😊👍

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