Monday, June 28, 2021

नशा (Nasha)

मोहब्बत  तो होते होते हो जाती है,
 वो ज़िन्दगी बनते बनते बन जाती है,

 कमी उनकी तब खली जब वो आँखों से दूर थे,
कोशिश बोहत की उनके काबिल बन सके,

जब अहसास हुआ की वो कभी,
हमारा मुक्कदर नहीं बन सकते,
हाँ, जब अहसास हुआ की वो कभी,
हमारा मुक्कदर नहीं बन सकते,
टुटा दिल इस कदर की वापिस हम
 जोड़ ना सके, जोड़ ना सके

भूलने उन्हें शराब का सहारा लिया,
पर शराब मैं वो नशा कहा, 
जो उनकी आँखों मैं है ,

डूबे इस समंदर मैं इस कदर की,
 लोग हमे शराबी कहने लगे,

अब इनको क्या कहें हम,
नशा हमे शराब का नहीं,
मोहब्बत का चढा हैं। मोहब्बत का चढ़ा हैं l.




Written by,
©Ashwini Chaudhary.

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